सब कुछ जे लुटा के अमीर बनल-कुमार मुकेश

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बेर पढ़ल गइल

लोगवा कहेला की हम पागल बानी
पूछे अइसे कि जइसे हम घायल बानी
राहे मंजिल ले पहुंचे के अइसन कसक,
मजेधार में कहे कि हम थाकल बानी.

नाव कागज के पानी पर तैरत चले
जइसे धारा बहे ओनिए बहत रहे
जानी हमहूँ कि का भाव पानी के ह,
आंख बंद करके चलीं,रहिया जानल हवे.

तन जे साथ रहे ना बहुत बात ह
मैन जे साथ रहे ना बहुत बात ह
हम त हारल बानी,अपने आप से,
मन जे सोचे त जीत,ना त हार ह.

हाथ से मत छोड़ीं हई पतवार के
बाटे मौका मिलल त आपन वार से
छट जाइ बदरिया किनारा मिली,
जन छोड़ीं कबो साथ विश्वास के.

सब कुछ जे लुटा के अमीर बनल
यार साथ ना कबहूं नसीब बनल
चढ़ी केतनो बुलंदी ‘कुमार’ रहे,
नज़र ईश्वर में उ त गरीब रहल.