जाने कइसे गजल में बदलिए गइल

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बेर पढ़ल गइल

अइसन लागल तहरा गइला से,कि प्राण निकालिए गइल
लागल ठोकर बहुत जोर से पर दिल सम्हरिये गइल
मन, तन,बन कहाँ कहाँ दिखाईं,
रहे लागल जवन घाव उ बस भरिये गइल.

मिलिहें बहुत तहरा जइसन कहले रहू,
बनवलू कांटा जे हमके निकालिए गइल.

चिर के दिल हथेली पर साजल रहे,
देखी के,मुड़ के फेरू भूलिए गइल.

जान तोहरा ला जान हमार हाजिर रहे,
काहें छूरी करेजा पर उ मारिये गइल.

दर्द अइसन लगा के जिनिगिया हमार,
जिनगी आपन उ कइसे सवारिए गइल.

दुख बहुते ‘कुमार’ रंग में प्यार के,
जाने कइसे गजल में बदलिए गइल.