रवीश कुमार पर शोशल मीडिया में एतना हंगामा काहें

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बेर पढ़ल गइल
पत्रकार रवीश कुमार

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश के हत्या के बाद पिछला दिने दिल्ली में पत्रकारन द्वारा प्रेस क्लब में एगो शोक सभा के आयोजन भइल. सगरो पत्रकार आपन आपन विचार सोझा रखलें.

समाचार चैनल एनडीटीवी के जानल मानल एंकर आ टीवी पत्रकार रवीश कुमार एह मुद्दे पर आपन विचार रखलें.

शोशल मीडिया पर रवीश कुमार जी के बात के तोड़ मरोड़ के पेश कइल जा रहल बा,जवन बात रवीश कबो कहबो भी ना कइले ओह बात के भी भाषण से कांट छांट के ,तोड़ मरोड़ के लोगन तक राखल जा रहल बा. लेकिन आप लोगन के बता दिहल जाव की रवीश कुमार अपना धाकड़ आ बेबाक बोल के बल पर लोगन के दिल मे जगह बनवले बाड़न.

लेकिन कुछ लोगन के ई बात निमन नइखे लागत अउर उ लोग रवीश कुमार के शोशल मीडिया पर बदनाम करे के कोशिश कर रहल बाड़ें.

लोग रवीश के खिलाफ शोशल मीडिया पर कंपेन चला रहल बाड़ें लेकिन सच्चाई कुछ अलगे बा,आईं जान लिहल जाव की प्रेस क्लब में रवीश कुमार आखिर का कहलें. रवीश जी के बात के हम भोजपुरी अनुवाद दे रहल बानी.

शुक्रिया मृणाल जी, कोशिश करब कि, ओह हद के पार न करीं लेकिन काल्हु जब से गौरी लंकेश के हत्या भइल बा, आ जब से ई ख़बर आईल, हम देखनी की हमनी के आस पास केतना हत्यारा बाड़ें.

मीडिया आ ट्विटर के टाइमलाइन पर हत्या करे वालन आ हत्या के मानसिकता के समर्थन करे वाला लोगन के एगो हुजूम उमड़ल, जवन बिना कवनो शर्म, संकोच आ कवनो सीमा, बंदिश के द्वारा एह हत्या के तरह-तरह के सवाल से जायज़ ठहरावे शुरू कइलसि.कबो उ एहमें कश्मीर के सवाल उठवलसि,त कबो केरल के सवाल.

हर सवाल के जवाब एह हत्या से ओकरा पहिले चाहीं. हमहन के अपना एकजुटता से एह सवाल पर बनल रहे के चाहीं कि हमहन के सबसे पहिले एह बात के जवाब चाहीं कि गौरी के हत्या के कइल. जांच होई कि ना होई, सिद्धरमैया जांच करवइहें की ना करवइहें.

उनकरा से कलबुर्गी के हत्या के मामले में भी कुछ ना भइल. अगर  उ चहतें त खुल के फ्रंट-रो पर लड़ सकत रहलें, आ एह जांच के, कलबुर्गी के जांच के, भी एके पेशेवर अंदाज़ में एगो नतीजा पर पहुंचा सकते रहलें, लेकिन ना पहुंचा पवलें.

एकर मतलब ई ना भइल कि महाराष्ट्र में जेकर सरकार बा, उ लोग दाभोलकर आ पानसारे के मामले में बहुत निमन काम कइलें बाड़ें. ओहिजा भी बीजेपी के ही सरकार बा,आ उनकर भी रवैया ओइसने बा.

त सरकार, पार्टियन के हिसाब से जेतना चाहे, बंट जाव, लेकिन उ हम लोगन के ही खिलाफ बाड़ें. आप चाहें महाराष्ट्र के उदाहरण से देखीं भ, फिर कर्नाटक के उदाहरण से देखल जाव. अइसन कबो ना आ कहीं ना भइल कि हत्या के एतना लोग जस्टिफाई कइलें.

हमके दुःख बा कि जवना आदमी के हिन्दुस्तान के जनता एतना चाहत से गद्दी सौंपलसि, उ अइसन आदमी के फॉलो करत बाड़ें, जवन कवनो के मुवला पर कुतिया शब्द के प्रयोग करत होखे.

हमरा दुःख बा अपने प्रधानमंत्री पर,काहें से कि हमहन के प्रधानमंत्री चाहे जेतना शिकायत कर लें एह देश से, उ ई शिकायत ना कर सकेलें कि जनता उनकरा के सत्ता सौंपे में कवनों कमी कइलसि.

 

उ जइसन बहुमत मंगलें, ओइसने बहुमत, ओह से भी कहीं ज़्यादा बहुमत हर राज्य में आ हर जगह दिहल गइल, त प्रधानमंत्री बतांवस कि उनकरा पास अइसन समय कहां आइल, कइसे, जबकि उनका सेवा कइला ला, सुतला के भी समय ना होला, जइसन उनकर टीम के कहना बा, अइसे में पीएम के ई बतावे के चाहीं की उनके समय कब मिलल की उ दधीचि जइसन लईकन के फॉलो करे शुरू कर दिहलें.

उ ई बतावें, आ चीन और बर्मा से जब लौटें, त पहिला काम ई करें कि दधीचि को अनफॉलो करें आउर उ ई बतावें, कहें कि हमसे गलती भइल बा. जब तक उ माफी ना मंगिहें ,तब तक हम अपना पार्टी के लोगन (पत्रकार जमात) से कहत रहब कि ई व्यक्ति हिन्दुत्व नेशनलिस्ट ना हो सके.

हमहन के एगो नागरिक के तौर पर अपने प्रधानमंत्री से मांग करे के चाहीं कि आप काहें दधीचि जी के फॉलो कर रहल बानी. उनकर अइसन का कॉन्ट्रीब्यूट बा, जवन कि हिन्दुस्तान के 80 फीसदी आबादी जवन बा,आपके वोट देते समय, 30 फीसदी आबादी वोट देत समय ना कर सकेले.

ई आदमी , का ई आदमी, या फिर अइसन आदमी आपके जिता रहल बाड़ें. का अइसन आदमी के ज़रूरत बा आपको सत्ता में पहुंचला के खातिर. उनकरा से एह सवाल के जवाब हमहन के मांगे के चाहीं.

गौरी लंकेश जी के जवनआखिरी संपादकीय बा, हम यह पर कुछ कहल चाहत बानी, हो सकेला कि आप लोग तक न पहुंचे. हम आज वार्ता भारती के अपने मित्र के ज़रिये कन्नड़ में लिखल उनकर ओह संपादकीय को पढ़त रहनी, आ अनुवाद करत रहनी, उनकी मदद से.

उ संपादकीय फेक न्यूज़ पर ही लिखल बा, आ ओह के पढ़ के बुझाइल कि फेक न्यूज़ के हमहन भले ही दिल्ली-सेंट्रिक देखल जाव, लेकिन राज्यन में भी एही तरह से एतना बवाल मचल बा कि लोगन के लगातार हिन्दू-मुस्लिम के दायरे में बांटल जा रहल बा.

हम पत्रकार लोगन में से ही रोज़ कुछ लोग काला कोट पहिन के रात 9 बजे से देश के अइसन मुद्दों में झोंक रहल बाड़ें, जवन आपके  हिन्दू बनाम मुसलमान में ले जा रहल बाड़ें. रोज़ के इहे काम हो गइल बा, अउर उहे तरह-तरह के फेक न्यूज़, एही के खिलाफ गौरी लंकेश लिखले रहली.

त उ जवन लिखत रहली, उ ठीक बा कि अबहीं हत्या के कारण पता नइखे चलल, उनकरा के मारे  वालन के पता नइखे चलल, लेकिन उनकरा लिखला के मिजाज़ के हिसाब से अगर केहू उनसे सहानुभूति प्रकट कर रहल बा, त उ गलत नइखे कइले.

ई जवन हत्या भइल बा, ई लगातार हत्या हो रहल बिया, आ गौरी लंकेश की हत्या के बहाने हर केहू के टाइमलाइन पर हत्यारन के फौज बा, और जे भी लिखल चाहत होखे उनकरा सहानुभूति में, हो सकेला कि ओहि लोग मतदाता होखे, ओह लोग के भी डरावल जा रहल बा.

अबहिने केहू पूछले रहल कि, आप इहां काहे आइल बानी. हम सब अपना खातिर त आइल नइखीं जा. हम सब एह खातिर आइल बानी जा कि एगो गौरी लंकेश के मारकर के ई संदेश दिहल जा रहल बा, व्यापक जनता के , कि आप भी चुप रहीं, आपके नौकरी चल गइल बा, स्कूल के फीस महंगा हो गइल बा, आप मत बोलीं, ना त आपके हालत भी  गौरी लंकेश जइसन होइ, आ समाज के हमहन अइसन बना देले बानी जा आपके लाश बिछल होइ, अउर ओह परमुस्कुरा रहल होई समाज, आ हंस रहल होइ.

ये हमहन के कायदा नइखे. ई हमहन के बतावे के होइ साफ-साफ कि जेकर भी सरकार बा ओहिजा , उनकरा ई सुन आ समझ लेबे के चाहीं. तरीका खोजे के चाहीं कि हमहन बार-बार श्रद्धांजलि देबे के खातिर ही इहां जमा न होंखल जा. ई हमहन के हार होत जाइ कि हमहन हर बार इहां श्रद्धांजलि के खातिर जुटल जाव.

ई कतहीं से भी निमन नइखे, हमहन क जवन बंट रहल बानी जा ओह से हमहन के का हासिल हो रहल बा ई हमहन के देख लेबे के चाहीं. हम लोग जवन सरकार आ नेता लोगन के करतूत पर पर्दा डाले शुरू कर देले बानी जा उ हम लोग अपना राजनीतिक आ वैचारिक वफादारी के चलते, ई हमहन लोग निमन नइखे जा कर रहल.

उ लोग भी निमन नइखे करत जे अच्छा नहीं करत जे विरोध के नाम पर विरोध कर रहल बा आ समर्थन के नाम पर समर्थन कइल जा रहल बाड़ें. ई दूनो ही एह में बराबर के कसूरवार बाड़ें.

एह खातिर एह बात के ख्याल रखल जाव कि ई हत्या एगो और हत्या के कहानी न बन जाए आ हम लोग एगो और श्रद्धाजंलि पर मिलला के कार्यक्रम बना रहल होखब.काल्हु रात से अइसन लग रहल बा कि जइसे हम जिंदा लाश हो गइल बानी, लोग हमके गोली मार देले बा आ आप लोग हमार लाश ढोवत चल रहल बानी.

देशभर से हमार सगरो शुभचिंतक, पाठक आ दर्शक लिखले कि आप अकेले बोलल छोड़ देईं,आप के भी ई लोग उहे हाल कर दिहें.गृहमंत्री आ प्रधानमंत्री के लिखीं कि सुरक्षा दिहल जाव. अरे भाई, जब चमचन के सुरक्षा ना दे पावल लोग, बस दुचार लोगन के ही एसपीजी सुरक्षा मिलल अइसे में उ लोग हमके सुरक्षा कहां से दिहें. आ केतना पत्रकार एसपीजी लेके चले वाला बाड़न.

ई ईगो राजनीतिक माहौल बनावल गइल बा. भले ही आप ओहमें सीधे शामिल नइखीं. लेकिने जवन माहौल आपके समर्थन कर रहल बा ई ओहि माहौल के पैदाइश ह जवन गौरी लंकेश के हत्या पर हंस रहल बा. ई शर्मनाक बा, ई हिंदुत्व के कइसन चेहरा ह कि केहू मर जाव आ हमलोग ओहिजा जाके हंसल जाव  आ कहल जाव कि कुतिया ह.

ई उहे समाज ह जेवन राम रहीम के खिलाफ लड़े वाली दूनो मेहरारू पक्ष में ना बोलल. आप कवनो महिला आयोग के अध्यक्ष के नाम जानत बानी जवन कि उ दूनो मेहरारू के पक्ष लेले होखस? कवना मंत्री, संत्री, महासचिव या फिर अध्यक्ष का नाम जानत बानी जे वह दू गो मेहरारू के बारे में कवनो ट्वीट कइले होखे.

ओह दूनो मेहरारू के लड़ाई की बदौलत ही इतना बड़ बाबा के साम्राज्य ध्वस्त भइल बा. लेकिन हमहन के समाज आ जवन जिम्मेदार लोग बाड़ें उ  सिर्फ स्लोगन में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ मान रहल बाड़ें. एगो महिला पत्रकार के हत्या भइल बा, ई सवाल भी बा, देश में महिला बड़ी मुश्किल से ओह ऊंचाई पर पहुंच पावेली जहां उ अपनी प्रखरता से समाज आ सरकार के आइना देखावेली.

गौरी जी के हत्या एगो प्रतिभा के नुकसान त अवश्य बा. काहें से कि एगो लमहर लड़ाई के बाद केहू एतना ऊंचाई पर पहुंच पावे ला आ अपना बात से समाज के प्रभावित कर पावेला, बात उठावे ला, ओह मोड़ पर केहू के जिंदगी खत्म हो गइल, ई निमन बात नइखे.

हमार इहे लड़ाई बा कि एह लड़ाई के कवनो अंजाम तक ले जाईल जाव. प्लीज, प्रधानमंत्री से प्रार्थना कइल जाव कि उ एह तरह के लोगन का फॉलो ना करें. अगर केहू नइखे मिलत उनकरा के हिंदुस्तान में तो हमकर फॉलो कर लेबे के चाहीं, हम उनकरा आश्वासन देत बानी कि बहुत आदर से आलोचना करब.उनके कभी भी अइसन ना लागी कि हम उनकर अपमान कइले बानी.

बहुते निमन निमन कविता सुनाईब, हिंदू धर्म के बहुत सारा श्लोक भी सुनाइब. उनके बुझइबे ना करी कि उ एगो अइसन हिंदुस्तान में बाड़ें जहां उनकर केहू कद्र नइखे करत. हम उनके पूरा-पूरा सम्मान देइब. लेकिन उ लड़कियन आ मेहरारुन के बारे में कवनो स्लोगन दिहला से पहिले एह बात के जवाब दें कि उनकरा सोहबत में दाधीच जैइसन नौजवान कहां से आ गइलें.

अउर जब उ आवेलें 17 सौ के क्लब में त उ ई बतावें आ ओह लईका से पूछें कि उ आपके मर्यादा के ख्याल काहें ना रखलसि. आ जब ई लईका प्रधानमंत्री के मर्यादा के ख्याल ना रख सकेलें त अइसे में बवलियन आ पागलन क फौज तईयार हो गइल बा. ई फौज आपके अकेले में भी घेर के मार सकेले आ जहां आप हज़ार की  संख्या में भी बानी ओहिजा भी आपके घेर के मार सकेले.

सवाल अपने-आप के बचावे के ही त बा , बाकी के  जनता के खातिर भी बा, जवन रोज लड़ रहल बिया कि एह प्राइम टाइम में उनकरा उसूल के जवाब मिल जाव, ओकरा सवाल पर सवाल उठे. रोज टीवी पर सरकार के तरफ से जवन गुंडा बइठेलें जवन करिया कोट लगाके बईठ रहल बाड़ें उ बस एगो डिजाइन ह. आप मानी भ मत मानी, मत देखीं, लेकिन दस साल बाद आपके इहे लउकी कि जनता के जवन सवाल बा, जवन बेचैनी बा ओह के कुचले के खातिर फर्जी मसला निकाल लिहल जात बा आ फर्जी मसले पर ही दिनरात चर्चा हो रहल बा.

एह तरह से लगातार लोगन के आकांक्षा के हत्या हो रहल बा, उनकरा के डेरवावल जा रहल बा, एगो भय के माहौल तइयार कइल जा रहल बा. एहि पेटर्न के समझीं. एही के शिकार भइल बाड़ी हमहन के साहसी गौरी लंकेश. एगो सहासिक पत्रकार. कन्नड़ में उनकरा लेख के अन्य दूसरा भाषा में भी आगे ले जाए के चाहीं, ताकि लोग जान सकें कि एह पत्रकार के का कसूर रहे जेकरा चलते उनकरा एह तरह मौत दे दिहल गइल.

त ई रहल रवीश जी के प्रेस क्लब में दिहल गइल वक्तव्य के भोजपुरी अनुवाद, हमहन लोगन के ई बतावत चाह रहल बानी जा की शोशल मीडिया पर रवीश जी के खिलाफ चलावल जा रहल फ़र्जी न्यूज़ कैप्शन से सावधान रहें के जरूरत बा.