घर घर के शान होली बिटिया – मुकेश यादव

हर घर घर के शान होली बिटिया
माई बाबू के पहिचान होली बिटिया

संमुदर के मोती कहाँ मिले सभके,
हर समाज के ताज होली बिटिया

पूत कपूत निकले त बढ़ बात नइखे,
माई बाबू के विश्वास होली बिटिया

पढ़ के , दिल सुन्न हो जाला एह दौर में,
समझ लीं, बुझ लीं, इंसान होली बिटिया

लाज पे आंच, कइसे के आवे ‘मुकेश’,
देश खातिर सिमा पर तैनात होली बिटिया..

हिंदी अनुवाद ……

हर घर की शान होती हैं बेटियां,
माँ बाप की पहचान होती हैं बेटियां

गहरे समुन्द्र में मोती कहाँ मिलता है सबको,
हर समाज का ताज होती हैं बेटियां

पूत कपूत निकाला तो बड़ी बात नही,
माँ बाप का विश्वास होती हैं बेटियां

पढ़ कर दिल सुन्न हो जाता है इस दौर में,
समझना होगा, इंसान ही होती हैं बेटियां

लाज पर आंच, क्यों आता है ‘मुकेश’,
हमारे लिए ही सिमा पर तैनात होती हैं बेटियां